
शिवपुरी (मध्य प्रदेश) — दरोनी तिराहा, शिवपुरी में करंट लगने से मजदूर कालीचरण पुत्र श्री ठाकुरलाल ओझा की मौत का मामला अब केवल एक हादसा नहीं, बल्कि झूठे दावे, पुलिसिया रौब, प्रशासनिक संरक्षण और लगातार हो रही गंभीर लापरवाहियों का उदाहरण बनता जा रहा है।
डर और धमकी से कराया गया जानलेवा काम
पीड़ित पक्ष के अनुसार काम पर कालीचरण और उसका हेल्पर गोलू गए थे। मकान मालिक राहुल दंडोतिया उर्फ बंटू उर्फ रामू, जो होमगार्ड में कॉस्टेबल बताया जा रहा है, ने 11 केवी लाइन बंद होने का दावा कर जबरदस्ती काम शुरू करवाया।
जब दोनों मजदूरों ने खतरे को देखते हुए काम करने से मना किया, तो आरोपी ने धमकी दी—
> “मैं पुलिस में हूं, काम नहीं किया तो थाने में बंद करा दूंगा।”
डर और दबाव में काम कराया गया और इसी दौरान करंट लगने से कालीचरण की मौके पर ही मौत हो गई।
अवैध अतिक्रमण बना मौत की वजह
पीड़ित पक्ष का कहना है कि जहां से 11 केवी लाइन गुजरती है, वहां अवैध रूप से टीन शेड लगाकर अतिक्रमण किया गया था। उसी पर दुकान का बोर्ड लगा था, जिसे हटाने और वहीं से सीढ़ी (जीना) लगाने का दबाव मजदूरों पर डाला गया। यह विद्युत सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन है।
एकमात्र कमाने वाले की मौत, परिवार पर आर्थिक संकट
कालीचरण अपने परिवार को चलाने वाला एकमात्र व्यक्ति था। उसकी मौत के बाद पत्नी और दो छोटे बच्चे पूरी तरह बेसहारा हो गए हैं। परिवार पर गंभीर आर्थिक संकट आ गया है और आजीविका का कोई साधन नहीं बचा।
जाम के बाद भी प्रशासन की बेरुखी
हादसे के बाद पीड़ित परिवार ने रेलवे क्रॉसिंग पर जाम लगाया, लेकिन इतनी गंभीर घटना के बावजूद कोई भी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी तत्काल मौके पर नहीं पहुंचा। बाद में केवल आश्वासन देकर जाम खुलवाया गया।
कैश में मामला दबाने का दबाव
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उन्हें 2 लाख रुपये देकर कैश में मामला खत्म करने का दबाव बनाया गया। यह प्रयास न्याय को दबाने और सच्चाई छिपाने की मंशा को दर्शाता है।
SDM–तहसीलदार पहुंचे, बोले “देख लेंगे”, लेकिन पीएम रिपोर्ट अब तक नहीं
घटना के बाद SDM और तहसीलदार मौके पर पहुंचे और कहा—
> “हम देख लेंगे, पीएम रिपोर्ट 2 दिन में आ जाएगी।”
लेकिन आज दिनांक 12/12/2025 से अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
पीड़ित परिवार सवाल उठा रहा है कि क्या पीएम रिपोर्ट में देरी भी किसी को बचाने की कोशिश है?
केवल एक धारा लगाकर मामला कमजोर करने का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने इस गंभीर मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की केवल धारा 105 ही दर्ज की है, जो कि मौत, धमकी, जबरन मजदूरी और विद्युत लापरवाही जैसे गंभीर तथ्यों के हिसाब से काफी कम और नाकाफी है।
परिवार का कहना है कि केवल एक हल्की धारा लगाकर मामले को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है, ताकि आरोपी को कानूनी लाभ मिल सके।
एफआईआर में देरी, गिरफ्तारी से बचने की कोशिश
घटना के तीन दिन बाद मुश्किल से एफआईआर दर्ज की गई। जब आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर सवाल किया गया, तो जवाब मिला—
> “हम कोशिश कर रहे हैं।”
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पूरा सिस्टम अपने ही विभाग के होमगार्ड कर्मचारी को बचाने में जुटा हुआ है।
परिवार की एक ही मांग — धाराएं बढ़ें और गिरफ्तारी हो
आरोपी राहुल दंडोतिया की तुरंत गिरफ्तारी कर जेल भेजा जाए
BNS की अन्य सख्त धाराएं तत्काल जोड़ी जाएं
पीएम रिपोर्ट में देरी की उच्चस्तरीय जांच हो
पीड़ित परिवार को तत्काल राहत, नौकरी और न्याय मिले
परिवार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे